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कोयलांचल में साहितियक वातावरण बनाने की दिशा में हिन्दी साहित्य विकास परिषद् की भूमिका का पता इसी बात से चल जाता है कि साहितियक रचनाकारों के बीच तालमेल स्थापित करने के लिए इसने देश के लगभग पैंतालिस सौ साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों, कवियों तथा हिन्दी भाषा प्रेमियों से सम्बन्ध बनाया है। हिन्दी साहित्य विकास परिषद् के उद्देश्यों में प्रमुख रूप से हिन्दी साहित्य के सर्वांगीण विकास के लिए विविध समारोहों का आयोजन करने कवि-सम्मेलनों को स्वस्थ साहितियक दिशा देने, साहितियक संस्कृतिक व सामाजिक ज्वलन्त प्रश्नों पर गोषिठयां, परिसंवाद व कार्यशालाएं आयोजित करने, साहितियक-सामाजिक पुस्तकें प्रकाशित करने, साहित्यकारों, कलाकारों, विचारकों व हिन्दी सेवियों को सम्मानित करने, धनबाद में एक भव्य हिन्दी भवन निर्माण, सह वृहत पुस्तकालय, वाचनालय की स्थापना करने के संकल्प शामिल हैं। परिषद् ने कोयलांचल में सर्वप्रथम गैरसरकारी स्तर पर पहला हिन्दी दिवस समारोह 1980 में भव्य रूप से प्रारम्भ किया, जो आज तक लगातार प्रत्येक वर्ष होता आ रहा है। परिषद् ने दो स्मारिकापुसितका तथा तीन काव्य पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है। परिषद् ने धनबाद में 1989 में 11 हिन्दी सेवी रचनाकारों को ससमारोह सम्मानित किया।

हिन्दी साहित्य विकास परिषद् के कार्यों व समारोहों को सफल बनाने में कोयलांचल के रचनाकारों, बुद्धिजीवियों के अलावा बाहर के विद्वानों का भी योगदान रहा है, जिनमें सर्वश्री शंकरदयाल सिंह, रामदयाल पांडेय, डा. शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, डा. भगवन्त सिंह, डा. बी. बी. धर, डा. आशा शुक्ला, डा. एस. एन. लाल गुप्त, डा. मुकुल उपाध्याय, प्रो. सुमन लता, डा. गोपाल प्रसाद आदि अनेक बाहर के विद्वान साहित्यकारों रचनाकारों और देश के ख्याति प्राप्त कवियों ने परिषद् के समारोह में भाग लेकर परिषद् को ऊँचार्इ प्रदान की है। परिषद् ने अब तक जिन साहित्यकारों को सम्मानित किया है। उनमें सर्वश्री डा. शंकर दयाल सिंह, ब्रहमदेव सिंह शर्मा, संजीव, डा. शिवनारायण सिंह शिवेश, श्रीमती कनक लता, रामगोपाल अग्रवाल, अमिताभ चक्रवर्ती, श्री श्याम बिहारी सिंह, श्यामल, सत्यनारायण अग्रवाल, सत्यनारायण, अरबिन्द चतुर्वेद, प्रो. राजेश्वर प्रसाद वर्मा ललित, डा. मृत्युंजय उपाध्याय, श्रीराम दूबे, विकल शास्त्री, डा. मृदुला शुक्ला, डा. मनोहर लाल गोयल, डा. श्रवण कुमार गोस्वामी, डा. अशोक प्रियदर्शी, डा. नरेश अग्रवाल आदि साहित्यकारों को ''हिन्दी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया है। सिमित साधनों के बावजूद हिन्दी साहित्य विकास परिषद् रचनात्मक और परिणामदायक कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने की दिशा में दिनोदिन आगे बढ़ रहा है। स्थापना काल से ही संस्था को प्रमुख रचनाकारों और हिन्दी साहित्य प्रेमियों का सहयोग व प्रोत्साहन मिलता रहा है। पिछले पृष्ठ पढ़ें